वीरों का बलीदान लिखूं-11-Feb-2024

वीरों का बलिदान लिखूं।
                 1
तुम नित नव-नव विज्ञान लिखों,
मैं त्याग समर्पण शान लिखू।
तुम लिखो राष्ट्र गौरव गाथा,
मैं विष हालाहल पान लिखूं।
              तुम आज़ादी के दीवानों का,
              स्वप्न वेदना शेष लिखों।
              मैं रूठी हुई उस रत्नवती की,
              अधर फसी अवशेष लिखूं।
               2
तुम पोरस का पौरुष लिखना,
मैं रण राणा चौहान लिखू।
तुम चन्द्रगुप्त चाणक्य लिखो,
मैं पानीपत मैदान लिखू।
              तुम लिखों पद्मिनी का जौहर,
              मैं स्वाभिमान सम्मान लिखूं।
              रग-रग उठी वो अंगड़ाई,
              मैं स्वतंत्रता संग्राम लिखूं।
              3
जो बाजी कभी नहीं हारा,
उस वीर शिवा की शान लिखों।
दो दिन जिया शेर जैसे,
तुम वो आज़ाद अभिमान लिखों।
              मैं भगतसिंह सुखदेव लिखूं,
              असफाक राजगुरु मान लिखूं।
              सुभाष कुंवर का शौर्य तेज,
              अब्दुल हमीद का प्राण लिखूं।
             4
स्वर्णिम युग में आओ मिलकर,
अभिनव की वो पहचान लिखें।
जो वीर अभी तक ओझल थे,
उन वीरों का गुणगान लिखें।
               कंकड़-कंकड़ तक त्याग दिया,
               उस त्याग का तुम परिणाम लिखों।
               मैं रक्त से तर्पण करने वाले,
               वीरों का बलिदान लिखूं।

स्वरचित, मौलिक, सर्वाधिकार सुरक्षित
      ✍🏼 चन्द्रगुप्त नाथ तिवारी
           भोजपुर (आरा) बिहार

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7 Comments

Mohammed urooj khan

13-Feb-2024 12:32 PM

👌🏾👌🏾👌🏾👌🏾

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Ajay Tiwari

12-Feb-2024 09:09 AM

Nice👍

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बेहतरीन अभिव्यक्ति और खूबसूरत भाव,,, उत्कर्ष शब्द संयोजन

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🙏🏽 सादर चरण वंदन

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